शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

भारत की विरासत हमारे तीर्थ - डा अशोक कुमार चौधरी मेरठ

तीर्थ किसी भी समाज व धर्म के प्रेरणा स्थल होते हैं। भारतीय जनमानस मे तीर्थों का विशेष महत्व है। भारतीय समाज खासतौर से हिंदू समुदाय में तीर्थो की भरमार है।यू जो तीर्थ प्रत्येक धर्म में होते हैं। जैसे मुस्लिम समुदाय में मक्का मदीना येरूशलम, यहूदी धर्म में येरुशलम, ईसाई धर्म में येरूशलम और वेटिकन सिटी।
हिंदू धर्म में सोमनाथ, उज्जैन, अयोध्या,काशी, बद्रीनाथ, केदारनाथ आदि जहां बड़े प्रसिद्ध तीर्थ है वही क्षेत्रीय स्तर पर भी अनेको तीर्थ मौजूद है,जिनका समाज में विशेष महत्व है। में मेरठ में निवास करता हूं,मेरठ के आसपास गगौल तीर्थ,मेरठ का औघड़नाथ का मंदिर,पुरा महादेव मंदिर, ब्रजघाट गंगा, शुक्रताल जैसे तीर्थ प्रसिद्ध है, जहां प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु जाते हैं।
मेरठ के गगौल तीर्थ के विषय में ऐसी मान्यता है कि यहा ऋषि विश्वामित्र ने तप किया था,यहा एक पानी का तालाब है,इसमे स्नान करने से चर्म से सम्बंधित रोग दूर हो जाते हैं।
वहीं औघड़नाथ का मंदिर बडा प्रसिद्ध है, यह शंकर भगवान का मंदिर है,शंकर भगवान युद्ध के देवता हैं,जिस समय अंग्रेजों के शासन में सूर्य अस्त नही होता था उस समय सन् 1857 में भारत के रणबांकुरों ने इसी औघड़नाथ के मंदिर से युद्ध के देवता शंकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर ब्रिटिश सत्ता को वो चुनौती पेश की थी,वैसी चुनौती अंग्रेजों को विश्व में कही से भी नही मिली।
मेरठ से बागपत रोड पर स्थित पुरा महादेव का मंदिर है।इस मंदिर पर सावन मास की शिव चोदस पर लाखों का संख्या में कांवड़िए शंकर भगवान पर हरिद्वार से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करते हैं।इस मंदिर की स्थापना लंढौरा की रानी लाडकौर ने करवाई थी।
ऐसी मान्यता है कि जब समुद्र मंथन के बाद विष निकला था और उस विष को शंकर भगवान ने पी लिया था,कंठ मे रोक लेने के कारण वह विष शरीर में गले से नीचे तो नही जा सका, परंतु मस्तिष्क में गर्मी पैदा कर रहा था,तब देवताओं ने भगवान शंकर के शीष पर जिस दिन से लगातार जल डालना शुरू किया था,उस दिन को शिव रात्रि कहा गया।जो प्रतीक के रूप में प्रत्येक वर्ष जल अर्पण कर मनाई जाती है।
इसी प्रकार गंगा के किनारे ब्रजघाट का तीर्थ है।यह मुक्ति का स्थान बताया जाता है।
राजा सकट के पुत्रों सहित 60000 समर्थक जब इस स्थान पर समाप्त हो गये थे, उनकी आत्माओ के तर्पण के लिए राजा सकट के वंशज भगीरथ ने अपनी तपस्या के फलस्वरूप ब्रह्मा जी के कमंडल से गंगा जी को भूमि पर लाये थे।तब अपने पुरखों का तर्पण किया था।ये मुक्ति का तीर्थ गढ़ मुक्तेश्वर अर्थात ब्रज घाट कहलाता है।
 शुक्रताल ऐसा पवित्र स्थान है जहां शुकदेव गोस्वामी ने 5000 साल पहले अभिमन्यु के पुत्र महाराज परीक्षित को पवित्र श्रीमद-भागवतम (भागवत पुराण) की कथा सुनाई थी । यह उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध पवित्र स्थान और मुज़फ्फरनगर से लगभग 28 किलोमीटर दूर पवित्र गंगा किनारे स्थित है । हर साल बहुत से तीर्थयात्री कार्तिक पूणिमा के दिन पवित्र नदी ‘गंगा’ में स्नान करने के लिए आते हैं।

शुक्रताल के अन्य दर्शनीय स्थान:
अक्षयवट (अनन्त वृक्ष): अक्षयवट एक पहाड़ी पर  स्थित है पुराणिक कथा के अनुसार इस अक्षयवट (बरगद का पेड़) के नीचे, ऋषि शुकदेव ने श्रीमद्भगवतीत कथा को राजा परीक्षित को सुनाया था। इस पेड़ की विशिष्टता यह है कि यह पेड़ कभी अपने पत्ते नहीं छोडता है ।

शुक्देव मंदिर: इस भव्य मंदिर में खूबसूरती से नक्काशी की गई ऋषि शुकदेव और राजा परीक्षित की मूर्तियां स्थापित है ।
 हनुमान मंदिर- शुकदेव मंदिर के नजदीक में ही हनुमान जी का एक विशाल मंदिर है । इस मंदिर के ऊपर हनुमान जी की 75 फुट ऊंची मूर्ती स्थापित है।

गणेश मंदिर- हनुमान जी के मंदिर के पास ही एक बेहद दर्शनीय गणेश मंदिर है जहाँ 35 फुट ऊँची भगवन गणेश जी की मूर्ती स्थापित है ।

इसके अतिरिक्त यहाँ भगवान शंकर मंदिर, स्वामी चरनदासजी मंदिर, भगवान राम मंदिर, देवी शाकंभरी मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर, गंगा मंदिर स्थापित हैं।

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