रविवार, 17 मई 2026

पदम श्री 2

1- पुरस्कारों के अतिरिक्त, उन सर्वोच्च सम्मानों, प्रमाणपत्रों (सर्टिफिकेशन्स), फैलोशिप, प्रतिष्ठित पदों, या मान्यता के अन्य रूपों की सूची दें जो नामांकित व्यक्ति को प्राप्त हुए हैं।
(क)  6 जुलाई सन् 2025 को फ्लेवर फेस्टा मेरठ मे आयोजित कार्यक्रम में "नेशनल काउंसिल ऑफ पीस एजुकेशन एंड रिसर्च" के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में डाक्ट्रेट अवार्ड से सम्मानित किया गया। 
(ख)"1857 के क्रांतिनायक शहीद धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ" द्वारा कोतवाल धन सिंह की जयंती 27 नवम्बर सन् 2025 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के नेता जी सुभाष चन्द्र बोस एडोटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में हरियाणा सरकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री राजेश नागर जी के कर कमलों द्वारा सम्मान प्राप्त हुआ।  
(ग)"1857 के क्रांतिनायक शहीद धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान मेरठ" द्वारा आयोजित क्रांति दिवस के अवसर पर मेरठ में आयोजित कार्यक्रम में 10 मई सन् 2025 को उत्तर प्रदेश के केबिनेट मंत्री श्री आशीष पटेल द्वारा शाल ओढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया गया 
(घ) अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा 11 अप्रैल सन् 2026 को हस्तिनापुर के निकट जय विलास पैलेस हंसापुर में आयोजित कार्यक्रम में बिहार और उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान के कर कमलों द्वारा "हस्तिनापुर सम्मान" नामक प्रतिक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया 
(ड)13-08-25 को अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला अमरोहा के द्वारा धनौरा मंडी के  वैकंट हाल में आयोजित कार्यक्रम में अमरोहा जिले के एसपी अमित कुमार आनंद और रामपुर रजा लाइब्रेरी के निदेशक डा पुष्कर सिंह मिश्रा के कर कमलों से सम्मानित प्रतीक चिन्ह प्राप्त हुआ।
2- नामांकित व्यक्ति के अपने क्षेत्र में किए गए कार्यों के प्रभाव का वर्णन करें, जो उनकी व्यक्तिगत उत्कृष्टता से परे हो।* (अधिकतम 400 शब्दों की अनुमति है)**

अशोक कुमार के द्वारा अपने क्षेत्र मेरठ जिले में कोतवाल धन सिंह जी के कार्यक्रम प्रारम्भ करने का सन् 1998 में यह प्रभाव पडा कि क्षेत्र के नवयुवकों में देश भक्ति का ज्वार उठने लगा।मेरठ में 10 मई सन् 1998 को पांचली खुर्द गांव में जो एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित किया गया,उसके अगले वर्ष 10 मई सन् 1999 को मेरठ शहर के अंदर तीन बड़े कार्यक्रम हुए तथा पूरा मेरठ क्रांतिमय हो गया। समाज आई इस चेतना के फलस्वरूप सन् 2002 में उत्तर प्रदेश सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय द्वारा मेरठ के कमिश्नर चौराहे के निकट कोतवाल धन सिंह जी की आदमकद प्रतिमा स्थापित हो गयी।
सन् 2010 में पांचली खुर्द गांव में "शहीद धन सिंह कोतवाल मंडलीय प्रशिक्षण केन्द्र होमगार्ड्स मेरठ" उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित हो गया।
10 मई सन् 2010 को पांचली खुर्द गांव में एक शहीद स्मारक व कोतवाल धन सिंह जी की प्रतिमा स्थापित कर दी गई।
3 जुलाई सन् 2018 को मेरठ के थाना सदर बाजार में कोतवाल धन सिंह जी की प्रतिमा स्थापित हो गई।
12 जुलाई सन् 2018 को चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय में "शहीद कोतवाल धन सिंह गुर्जर समुदायिक केंद्र" स्थापित हो गया।
26-09-2021 को मेरठ से किला परिक्षत गढ़ रोड जेल चुंगी पर "अमर शहीद राजा कदम सिंह मार्ग" के नाम का पत्थर जो कई वर्ष पूर्व टूट गया था, प्रताप राव गुर्जर स्मृति समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार/अशोक चौधरी ने पुनः स्थापित करवा दिया।
11 मार्च 2023 को "कोतवाल धन सिंह गुर्जर पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय मेरठ" मेरठ में स्थापित हो गया।
15 मार्च 2024 को मेरठ के शहीद स्मारक पर कोतवाल धन सिंह जी की एक प्रतिमा स्थापित हो गई।
इस बीच पांचली खुर्द में बने इंटर कालेज का नाम "क्रांतिनायक धन सिंह कोतवाल इंटर कालेज पांचली खुर्द"कर दिया गया।
समाज हुए इस बदलाव का प्रभाव यह हुआ कि मेरठ ही नहीं मेरठ के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में भी देशभक्ति का ज्वार बहने लगा,जिस कारण मेरठ के आसपास कस्बे मवाना,पूठी,सरधना आदि में क्रांतिकारियों की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किए जाने लगे। मवाना किसान इंटर कालेज में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान कोतवाल धन सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई।इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने सहभागिता की।
गांव पूठी में कोतवाल धन सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ने सहभागिता की।
गांव पूठी में अमर क्रांतिकारी राव कदम सिंह के नाम का द्वार गांव पंचायत ने बनवाया।
मेरठ के पास गगोल तीर्थ पर एक शहीद स्मारक का निर्माण हो गया। सम्पूर्ण मेरठ,मेरठ के क्रांतिकारी महापुरुषों के सम्मान से ओतप्रोत हो गया।
यहाँ दोनों प्रश्नों का हिंदी अनुवाद दिया गया है:

 3- बड़े पैमाने पर समाज में नामांकित व्यक्ति के कार्यों के प्रभाव का वर्णन करें, जिसमें उनके द्वारा की गई सभी प्रकार की निःस्वार्थ सेवा / सामाजिक कार्य शामिल हों। (अधिकतम 400 शब्दों की अनुमति है)**

चौधरी रघुवीर नारायण सिंह - मेरठ में रघुबीर नारायण सिंह नाम के एक स्वतंत्रता सेनानी हुए हैं,उनका गांव आज हापुड़ जिले में है।वो  महात्मा गांधी के आव्हान पर आजादी की लडाई में शामिल हो गए थे। अंग्रेजों की यातना सहन करने के साथ उन्होंने क्षेत्र के आम आदमी की जरूरत पूर्ति हेतु अपनी सम्पत्ति को  दान कर दिया ,मेरठ में सैकड़ों एकड़ में बना गांधी आश्रम उनके ही द्वारा दान की हुई जमीन पर बना है।मेरठ में गढ रोड पर कैलाश पुरी कालोनी में "कुमार आश्रम" के नाम से छात्रों के पढ़ने हेतु एक हास्टल का अपनी निजी जमीन देकर दलित छात्रों हेतु छात्रावास उन्होंने बनवाया।जो उस समय एक बडा कार्य था।
श्री कैलाश प्रकाश - कैलाश प्रकाश जी मेरठ के जाने-माने व्यक्ति रहें,वो मेरठ के पास किला परिक्षत गढ़ कस्बे के रहने वाले थे, उन्होंने महात्मा गांधी जी के साथ भारत की आजादी के आंदोलन में भाग लिया था।वो सन् 1952 में हुए पहले चुनाव में विधायक बने तथा 1977-79 तक लोकसभा के सदस्य रहें। उन्होंने मेरठ में मेडिकल कालेज,मेरठ में विश्वविद्यालय के निर्माण में अहम भूमिका निभाई,आज भी मेरठ में स्पोर्ट्स स्टेडियम का नाम उनके नाम पर है।मेरठ के आम जनमानस में उनका बडा सम्मान है।
चौधरी चरण सिंह - चौधरी चरणसिंह जी का पेतृक गांव भी उनके समय मेरठ जिले में ही था जो आज हापुड़ जिले में है। चौधरी चरणसिंह जी महात्मा गांधी जी के लिए आजादी के आंदोलन में रहें।  वो सन् 1937 मे हुए पहले विधानसभा चुनाव में छपरौली से विधायक रहें। उत्तर प्रदेश में जमींदारा समाप्त कर आम किसान को जमीन का मालिकाना हक दिलवाने में उनकी बडी भूमिका रही, मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने यह कानून बना दिया कि सरकारी पैसे का अनुदान किसी जाति के नाम पर बनी संस्था को नही मिलेगा, उनके इस आदेश के बाद ही उत्तर प्रदेश में जाट कालिज, गुर्जर कालिज आदि संस्थाओं के नाम जाति से बदल कर दूसरे रखे गये।
वो देश के प्रधानमंत्री रहे तथा भारत रत्न से सम्मानित भारत सरकार द्वारा किए गए।
मेरठ मे विश्वविद्यालय का नाम चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय है तथा जेल का नाम भी चौधरी चरणसिंह जेल है।
श्री रामचन्द्र विकल - रामचंद्र विकल जी मेरठ के पास स्थित बुलंदशहर जिले के निवासी थे,वो महात्मा गांधी जी के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में गांधी जी के सहयोगी रहे। सन् 1952 में बुलंदशहर के अंतर्गत सिकंदरा बाद पश्चिम से विधायक रहें।
सन् 1962 में चीन के युद्ध के बाद जब उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों पर लगान बढाया,तब रामचंद्र विकल जी ने अपनी ही पार्टी का विरोध कर विधानसभा से स्तीफा दे दिया।वो किसान और गरीब हित के लिए संघर्षरत रहें, उत्तर प्रदेश सरकार मे 1967-69 तक उप मुख्यमंत्री रहें।1984-1990 तक सांसद रहें, उसके बाद राज्य सभा सदस्य रहें।


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